Maya Kashyap
Kitchen Supervisor at Nestlé
- Role
- Kitchen Supervisor at Nestlé
- Location
- Kanpur, UP, IN
- LinkedIn followers
- 500 followers
About Maya Kashyap
आजकल नास्तिकता क्यों बढ़ रही है (युवा पिढ़ी को अकसर ये बोलते सुना जाता है कि वो भगवान को नहीं मानते)?नास्तिकता का अर्थ होता है भगवान को नहीं मानना, भगवान पर भरोसा नहीं करना।वर्तमान में कलयुग है। इसमें अधर्म बढ़ चुका है। कलयुग में मानव की भक्ति के प्रति आस्था कम हो जाती है या तो भक्ति करते ही नहीं यदि करते हैं तो शास्त्र विधि त्याग कर मनमानी भक्ति करते हैं। जो श्रीमद् भगवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23.24 में वर्जित हैं। जिस कारण से परमात्मा से जो लाभ वांछित होता है वह प्राप्त नहीं होता। इसलिए अधिकतर मनुष्य नास्तिक हो जाते हैं। धनी बनने के लिए रिश्वत, चोरी, डाके डालने को माध्यम बनाते हैं। परन्तु यह विधि धन लाभ की न होने के कारण परमात्मा के दोषी हो जाते हैं तथा प्राकृतिक कष्टों को झेलते हैं। परमेश्वर के विधान को मानव भूल जाता है कि किस्मत से अधिक प्राप्त नहीं हो सकता। यदि अन्य अवैध विधि से धन प्राप्त कर लिया तो वह रहेगा नहीं। जैसे एक व्यक्ति अपने पुत्र को सुखी देखने के लिए अवैध विधि से धन प्राप्ति करता था। कुछ दिनों पश्चात् उस के पुत्र के दोनों गुर्दे खराब हो गए। जैसे तैसे करके गुर्दे बदलवाए, तीन लाख रूपये खर्च हुआ। जो धन अवैध विधि से जोड़ा था वह सर्व खर्च हो गया तथा कुछ रूपये कर्जा भी हो गया। फिर लड़के का विवाह किया। छः महिने के पश्चात् बस दुर्घटना में इकलौता पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुआ। अब न तो पुत्र रहा और न ही अवैध विधि से अर्जित किया गया धन। शेष क्या रहा? अवैध विधि से धन संग्रह करने में किए हुए पाप, जो अभी शेष हैं, उनको भोगने के लिए जिस- जिस से पैसे ऐंठे थे, उनका पशु (गधा, बैल, गाय ) बनकर पूरे करेगा। परन्तु परम अक्षर ब्रह्म (परमेश्वर कबीर जी) की शास्त्रनुकूल साधना करने वाले भक्त की किस्मत को परमेश्वर बदल देता है।क्योंकि परमेश्वर के गुणों में लिखा है कि परमात्मा निर्धन को धनवान बना देता है।सत्ययुग में कोई भी प्राणी मांस-तम्बाखु, मदिरा सेवन नहीं करता। क्योंकि वे इनसे होने वाले पापों से परिचित होते हैं।सत्ययुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता। शांति होती है। पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नहीं होती, स्त्री विधवा नहीं होती। रोग रहित शरीर होता हैं। सर्व मानव भक्ति करते हैं। परमात्मा से डरने वाले होते हैं क्योंकि वे आध्यात्मिक ज्ञान के सर्व कर्मों से परिचित होते हैं। मन, कर्म, वचन से किसी को पीड़ा नहीं देते तथा दुराचारी नहीं होते। जति-सति, स्त्री पुरूष होते हैं। वृक्षों की अधिकता होती हैं। सर्व मनुष्य वेदों के आधार से भक्ति करते हैं।वेदों के आधार पर भक्ति सिर्फ पू्र्ण संत ही बताता है वे पूर्ण संत रामपाल जी महाराज है। पूर्ण सतगुरु रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लें एवं सभी लाभों के साथ आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें। वर्तमान में पूरे ब्रह्मांड में एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं जिनकी शरण में अविलंब आएं और अपना जीवन सफल बनायें। सन्त रामपाल जी द्वारा लिखित पुस्तक “ज्ञान गंगा ” पढ़ें और “सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल” पर सत्संग सुनें।
Experience
Kitchen Supervisor
Present
Education
Guru Nanak girls degree College Kanpur
Bachelor of Arts - BA
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